
आर्थिक विकास हमेशा से मानव सभ्यता की 2025 का नोबेल पुरस्कार सबसे बड़ी पहेली रही है। सदियों तक दुनिया लगभग एक ही स्तर पर रही — न कोई बड़ा तकनीकी चमत्कार, न ही जीवन स्तर में खास सुधार। लेकिन 18वीं शताब्दी के बाद मानो मानवता ने गति पकड़ ली। उद्योग क्रांति आई, तकनीकी आविष्कार हुए और दुनिया ने अभूतपूर्व प्रगति देखी। इसी रहस्य को सुलझाने और “नवाचार आधारित आर्थिक विकास” को समझाने के लिए जोएल मोक्यर (Joel Mokyr), फिलिप एघियोन (Philippe Aghion) और पीटर हाउइट (Peter Howitt) को 2025 का अर्थशास्त्र में नोबेल पुरस्कार दिया गया है।
आर्थिक विकास को नई दिशा देने वाले तीन विचारक
ये तीनों अर्थशास्त्री इस बात को समझाने में सफल रहे कि आखिर कैसे और क्यों दुनिया ने अचानक इतनी तेज़ी से विकास किया, और यह विकास कहाँ से शुरू हुआ। मोक्यर, एघियोन और हाउइट का शोध यह बताता है कि आर्थिक प्रगति केवल धन और संसाधनों पर निर्भर नहीं होती, बल्कि यह तकनीक, संस्कृति और संस्थागत ढांचे पर भी आधारित होती है।
जोएल मोक्यर का “संस्कृति और ज्ञान का सिद्धांत”
जोएल मोक्यर का मानना है कि औद्योगिक क्रांति (Industrial Revolution) कोई ऐतिहासिक दुर्घटना नहीं थी, बल्कि यह यूरोप की सामाजिक और संस्थागत संरचना का परिणाम थी। उन्होंने दो प्रकार के ज्ञान को आर्थिक विकास की कुंजी बताया — प्रस्तावात्मक ज्ञान (Propositional Knowledge), यानी यह समझना कि चीजें क्यों और कैसे काम करती हैं, और व्यवहारिक ज्ञान (Prescriptive Knowledge), यानी यह जानना कि उन चीजों को बेहतर तरीके से कैसे लागू किया जा सकता है।
मोक्यर कहते हैं कि यूरोप के विभिन्न राज्यों में प्रतिस्पर्धा और विचारों की स्वतंत्रता ने नवाचार को जन्म दिया। चीन और भारत जैसे देशों में जहां विचारों पर नियंत्रण था, वहीं यूरोप की राजनीतिक विखंडन ने वैज्ञानिक और तकनीकी प्रगति को प्रोत्साहन दिया। उनके अनुसार, यह “संस्कृति आधारित विकास (Culture of Growth)” ही मानव प्रगति का आधार बनी।

एघियोन और हाउइट का ‘क्रिएटिव डिस्ट्रक्शन’ मॉडल
दूसरी ओर, फिलिप एघियोन और पीटर हाउइट ने अर्थशास्त्र को एक नया दृष्टिकोण दिया — Creative Destruction का सिद्धांत, जिसे मूल रूप से जोसेफ शूम्पीटर ने प्रस्तावित किया था। इस सिद्धांत में बताया गया कि नवाचार कैसे पुराने विचारों और तकनीकों को नष्ट करते हुए नई प्रगति का मार्ग खोलता है।
उनके मॉडल के अनुसार, कंपनियाँ दो प्रकार की शक्तियों से प्रेरित होती हैं — “इनाम” और “खतरा”। इनाम (Carrot) उन्हें नवाचार करने के लिए प्रेरित करता है ताकि वे बाजार में बढ़त हासिल कर सकें, जबकि खतरा (Stick) उन्हें यह याद दिलाता है कि अगर वे नवाचार नहीं करेंगी, तो कोई और उन्हें पीछे छोड़ देगा।
लेकिन उन्होंने यह भी दिखाया कि जब किसी कंपनी के पास अत्यधिक नियंत्रण या लाभ होता है, तो वह प्रतिस्पर्धा को रोक सकती है और नवाचार की रफ्तार धीमी पड़ जाती है। यही कारण है कि कुछ उद्योग लगातार प्रगति करते हैं जबकि कुछ ठहर जाते हैं।
तकनीक और संस्कृति: आर्थिक विकास के दो पहिए
मोक्यर, एघियोन और हाउइट के विचार एक ही दिशा में इशारा करते हैं — कि आर्थिक विकास केवल संसाधनों की बात नहीं है, बल्कि यह एक संस्कृतिक और तकनीकी प्रक्रिया है। जब समाज में स्वतंत्रता, जिज्ञासा और नए विचारों के प्रति खुलापन होता है, तब नवाचार जन्म लेता है। और जब यह नवाचार संस्थानों, शिक्षा और उद्योगों के साथ जुड़ता है, तो विकास की रफ्तार असीम हो जाती है।
यूरोप में औद्योगिक क्रांति इसी का उदाहरण थी, जहां ज्ञान, प्रतिस्पर्धा और नवाचार ने मिलकर एक नई दुनिया की नींव रखी। यही सोच आज भी आधुनिक अर्थव्यवस्था के केंद्र में है — चाहे वह कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) हो, हरित ऊर्जा हो या डिजिटल व्यापार।
2025 का नोबेल पुरस्कार: नवाचार के मूल्य की मान्यता
यह पुरस्कार न केवल तीन महान अर्थशास्त्रियों के योगदान की स्वीकृति है, बल्कि यह इस बात का प्रतीक भी है कि मानवता ने अब यह समझ लिया है — विकास केवल पूंजी से नहीं, बल्कि विचारों से होता है।
मोक्यर की “Culture of Growth”, एघियोन और हाउइट का “Creative Destruction Model” और उनके शोध का मूल संदेश यही है — जब समाज विचारों और नवाचार को स्वतंत्रता देता है, तब वह खुद को गरीबी और ठहराव से मुक्त कर लेता है।
निष्कर्ष: भविष्य के विकास का मार्ग तकनीक और संस्कृति से ही निकलेगा
2025 का अर्थशास्त्र में नोबेल पुरस्कार हमें यह याद दिलाता है कि किसी भी राष्ट्र की असली संपत्ति उसके लोग और उनके विचार होते हैं। नवाचार तभी फलता-फूलता है जब समाज उसे अपनाने और समझने के लिए तैयार हो।
आज जब दुनिया नई तकनीकी क्रांति के दौर से गुजर रही है, तब इन तीन अर्थशास्त्रियों का शोध हमें यह सिखाता है कि तकनीक को सफल बनाने के लिए हमें एक खुला, जिज्ञासु और नवाचारप्रिय समाज बनाना होगा। यही सच्चा “विकास” है — जो संस्कृति से शुरू होकर तकनीक के माध्यम से दुनिया को बदल देता है।
अस्वीकरण:
यह लेख केवल शैक्षिक और सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए लिखा गया है। इसमें दी गई जानकारी उपलब्ध सार्वजनिक स्रोतों पर आधारित है। इसका उद्देश्य किसी वित्तीय, निवेश या राजनीतिक निर्णय को प्रभावित करना नहीं है।





